Bhagavad Gita for Pregnancy - Hindi Edition
Bhagavad Gita for Pregnancy - Hindi Edition
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प्रेग्नेंसी में मन में बहुत कुछ चलता रहता है। यह किताब आपको अपने भीतर थोड़ा सुकून पाने में मदद करती है।
इस किताब के बारे में और जानें
भगवद्गीता के 108 श्लोक, रोज़ 10 मिनट अपने लिए। एक शांत मन और अपने बच्चे के साथ उस रिश्ते के लिए, जो जन्म से पहले ही शुरू होता है।
यह किताब किसके लिए है
- उन मॉम्स-टू-बी के लिए, जिन्हें और सलाह नहीं, बल्कि रोज़ कुछ करने का एक आसान तरीका चाहिए
- जो अपने बच्चे के साथ बिना स्क्रीन के, कुछ पल शांति से बिताना चाहती हैं
- उन मॉम्स-टू-बी के लिए, जिन्हें भगवद्गीता का ज्ञान पसंद है और वे उसे प्रेग्नेंसी में अपनाना चाहती हैं
- उन लोगों के लिए, जो ऐसा गिफ़्ट देना चाहते हैं जो सिर्फ़ प्यारा नहीं, बल्कि मायने भी रखता हो
किताब के अंदर क्या है
- 108 श्लोक, संस्कृत उच्चारण और आसान हिंदी अर्थ के साथ
- हर श्लोक के बाद एक प्रेग्नेंसी रिफ्लेक्शन
- 12 थीम्स जैसे धर्म, स्थितप्रज्ञ, करुणा, जय और अन्य विषय, 12 गाइडेड एक्टिविटी
- रोज़ 10 मिनट। किसी भी ट्राइमेस्टर में शुरू करें
- 148 पेज। एक यादगार किताब, जिसे आपका बच्चा एक दिन खुद पढ़ सकेगा
हमने यह किताब क्यों बनाई
प्रेग्नेंसी को एक खूबसूरत और जादुई सफर माना जाता है। लेकिन हर दिन ऐसा महसूस नहीं होता। कभी खुश न रह पाने का गिल्ट होता है, कभी खुशियों के बीच भी अकेलापन लगता है, और कभी अपना शरीर भी अपना सा नहीं लगता।
आज की साइंस बताती है कि प्रेग्नेंसी के दौरान माँ की भावनाएँ बच्चे के शुरुआती ब्रेन डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकती हैं। लगभग 5,000 साल पहले भगवद्गीता भी हमें कुछ ऐसा ही समझाती है। जब अर्जुन अपने मन के बोझ से परेशान थे, तब श्रीकृष्ण ने उनसे अपनी भावनाओं को दबाने के लिए नहीं कहा। उन्होंने उन्हें अपनी भावनाओं को समझने और जागरूकता के साथ उनका सामना करने का रास्ता दिखाया।
यह किताब उसी बातचीत को आज की मॉडर्न मदरहुड से जोड़ती है। एक श्लोक। एक रिफ्लेक्शन। और आपके लिए कुछ शांत पल।
गीता आपके बच्चे तक कैसे पहुंचती है
पंचकोश फिलॉसफी के अनुसार आप 5 परतों से बनी हैं: शरीर, सांस, मन, बुद्धि और आनंद। यह किताब उन तीन परतों पर काम करती है जो प्रेगनेंसी में सबसे ज़्यादा शोर करती हैं।
मन (मनमय कोश): रात के 3 बजे तक चलती सोच, दूसरों से तुलना और गिल्ट। गीता सिखाती है स्थितप्रज्ञ होना, यानी भावनाओं के उतार-चढ़ाव के बीच भी मन को स्थिर रखना।
बुद्धि (विज्ञानमय कोश): चारों तरफ़ से आती सलाह और गलत फैसला लेने का डर। गीता सिखाती है सही-गलत को समझने की दृष्टि, यानी शोर के बीच भी साफ़ सोच।
आनंद (आनंदमय कोश): किसी खुशी के पल में भी महसूस होने वाला अकेलापन। गीता सिखाती है आनंद, ऐसा सुख जो किसी नतीजे पर निर्भर नहीं करता। यही आपके बच्चे को दिया जाने वाला सबसे गहरा उपहार हो सकता है।
शरीर और साँस के लिए उनकी अपनी प्रैक्टिस ज़रूरी है। यह किताब उन तीन परतों के लिए है, जिनके लिए अक्सर कोई और आपका साथ नहीं देता।
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